आई तीसरी लहर की आहट, बेंगलुरु में 6 दिन में 300 बच्चे बने शिकार

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सेंट्रल डेस्क: बेंगलुरु में कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है, जहां राज्य में 23 अगस्त से कक्षा 9-12 तक के स्कूल भी खुलने वाले हैं। वहां बीते छह दिन में 300 से ज्यादा बच्चे कोरोना संक्रमित पाए गए हैं । बेंगलुरु में बीते 6 दिनों में 19 साल से कम वर्ष के 300 बच्चें कोरोना संक्रमित मिले हैं। पहले ही इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि कोरोना के तीसरी लहर में बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होंगे। बेंगलुरु में इतनी ज्यादा संख्या में बच्चों में संक्रमण मिलने से तीसरी लहर को लेकर चिंता बढ़ गयी है।

(BBMP) ब्रुहट बेंगलुरु महानगर पालिका के आकड़ों के अनुसार बीते छह दिन में 300 बच्चे कोरोना से संक्रमित मिले हैं,जिनमें से 127 की उम्र 10 साल से कम है, उनका कोरोना टेस्ट 5 से 10 अगस्त के बीच किया गया था। इसके अतिरिक्त 174 कोरोना संक्रमित बच्चों की उम्र 10 से 19 साल के मध्य है जो बीते छह दिनों में पॉजिटिव मिले हैं। भारत में कोरोना की तीसरी लहर उस वक़्त आयी है जब बच्चों के लिए कोविड वैक्सीन आना बाकी है, वहीं BBMP के मुख्य आयुक्त गौरव गुप्ता का कहना है कि ‘हमें घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि पिछले छह दिनों में जितने बच्चे कोरोना संक्रमित हुए है, हमने उसके डेटा को पिछले साल आए कोरोना के मामलों से मिलाया है दोनों डेटा लगभग समान ही हैं। हम डेटा पर सावधानी से नजर बनाएं हुए हैं, हम परिस्थति का आकलन कर रहे हैं और हम कोरोना के तीसरी लहर के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हम खासकर बच्चों पर इस दौरान ध्यान दे रहे हैं।’

वहीँ (BBMP) के हेल्थ डिपार्टमेंट के एक सीनियर का कहना है कि ‘हम बच्चों में मिल रहे कोरोना के मामले को देखते हुए एक्सपर्ट से सलाह ले रहे हैं। एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों में कोरोना का प्रसार होने और तीसरे लहर के आने की आहट के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि बच्चों को अभी तक कोविड वैक्सीन नहीं दी गई है।’ बात अध्ययन की बताएं तो कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को उतना नुकसान नहीं पंहुचा रही है, जितना वह दूसरे उम्र के लोगों को पहुंचा रही थी। साथ हे उन्होंने कहा कि ‘बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए मां-बाप को कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करना चाहिए और इसके बारे में बच्चों को भी बताना चाहिए। कोरोना फैलने का सबसे बड़ा खतरा युवा वर्ग से है जो हमेशा घर से बाहर जाते हैं और कोविड प्रोटोकॉल्स का का पालन नहीं करते हैं।’

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